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अंतरधार्मिक एकता
के प्रतीक

राष्ट्रीय स्तर पर संचालित पहलों की एक संक्षिप्त झलक

50+ कार्यक्रम
आयोजित

पूरे भारत में 6 अल्पसंख्यक समुदायों के साथ सक्रिय सहभागिता हेतु

शामिल राज्य एवं
केंद्र शासित प्रदेश

पंजाब | हरियाणा | जम्मू और कश्मीर | उत्तर प्रदेश | महाराष्ट्र | केरल | ओडिशा | मध्य प्रदेश | गुजरात | राजस्थान | चंडीगढ़ | लद्दाख

1000+
समुदाय

नेता और धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हुए

सभी अल्पसंख्यक समुदायों के साथ सक्रिय सहभागिता

सिख | मुस्लिम | जैन | बौद्ध | ईसाई | पारसी

19 संप्रदाय
शामिल

सिख – 6 संप्रदाय | मुस्लिम – 7 संप्रदाय | जैन – 2 संप्रदाय | बौद्ध – 2 संप्रदाय | ईसाई – 2 संप्रदाय

400+
 आध्यात्मिक नेता

International Affairs Award Ceremony

राष्ट्रीय पहलें

  • अल्पसंख्यक कल्याण एवं समावेशन कार्यक्रम
  • सांस्कृतिक विरासत व फैशन कार्यक्रम
  • धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन
  • मान्यता व सम्मान समारोह
  • सम्मेलन एवं संवाद मंच
  • राष्ट्रीय एकता व अखंडता अभियान
  • प्रवासी भारतीय सहभागिता
  • सामुदायिक सशक्तिकरण व सामाजिक विकास कार्यक्रम

ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम

सद्भावना—भाईचारे, शांति और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने का एक प्रेरक मिशन—हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। एक वैश्विक सद्भावना राजदूत की भूमिका निभाते हुए, श्री नरेंद्र मोदी जी ने लगभग एक दशक पूर्व अपने गृह राज्य गुजरात से एकता और सामाजिक समरसता के मूल्यों को सुदृढ़ करने हेतु सद्भावना की यात्रा का शुभारंभ किया था।
माननीय प्रधानमंत्री के इसी दूरदर्शी विज़न से प्रेरित होकर ‘ सद्भावना: ए जेस्चर ऑफ गुडविल’ की परिकल्पना की गई। सद्भावना की यह यात्रा 29 अप्रैल, 2022 को भारत की राष्ट्रीय राजधानी के हृदय से आरंभ हुई।

राष्ट्रीय प्रगति में सद्भाव की निर्णायक भूमिका को गहराई से समझते हुए, इस पहल के अंतर्गत वैश्विक सिख समुदाय से संवाद स्थापित किया गया। छह महाद्वीपों से 140 से अधिक प्रतिष्ठित एवं अत्यंत सफल सिख व्यक्तित्व एकजुट हुए और सद्भाव के एक प्रतिनिधि दल के रूप में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से उनके आवास पर भेंट की। इस अवसर पर, उनके विनम्र और समर्पित प्रयासों के माध्यम से सिख समुदाय में दिए गए योगदान के प्रति आभार स्वरूप, सद्भावना की भावना उन्हें सद्भाव के प्रतीक के रूप में अर्पित की गई।

भारत के प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद, माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी का सिख समुदाय के प्रति सम्मान और आत्मीयता उनकी सरकार के कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णयों के रूप में सामने आई। इनमें करतारपुर साहिब कॉरिडोर का उद्घाटन, 1984 के दंगों के पीड़ितों को दशकों से लंबित न्याय दिलाना, तथा गुरुद्वारों में लंगर के लिए प्रयुक्त सामग्री को GST से मुक्त करना जैसे महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं। इन पहलों ने विश्वभर के सिख समुदाय में गहरा सम्मान और व्यापक सराहना प्राप्त की है।

यह पुस्तक श्री नरेंद्र मोदी जी के उन प्रतिबद्ध प्रयासों को डॉक्यूमेंट करने की एक कोशिश है, जिनके माध्यम से उन्होंने भारत और विदेशों में स्थित सिखों के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण को सुदृढ़ किया। साथ ही, सिख गुरुओं की पावन भूमि पंजाब को आर्थिक रूप से सशक्त और राजनीतिक रूप से मजबूत राज्य के रूप में विकसित करने हेतु बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं की शुरुआत की, जिससे पंजाब को एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारत की गौरवशाली पहचान का अभिन्न हिस्सा बनाया जा सके।

इस पुस्तक का विमोचन नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे. पी. नड्डा तथा तत्कालीन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा किया गया।

वाराणसी में आयोजित ‘सद्भावना’ कार्यक्रम ने सांस्कृतिक और धार्मिक समरसता का भव्य संगम देखने को मिला, इस ऐतिहासिक आयोजन में 450 से अधिक प्रतिष्ठित गणमान्य अतिथियों की सहभागिता रही, जिनमें सिख और हिंदू समुदायों के प्रमुख धार्मिक नेता, शिक्षाविद, खिलाड़ी, वैज्ञानिक, परोपकारी, शांति कार्यकर्ता, विधायक एवं नीति-निर्माता शामिल थे, जिन्होंने इस अवसर को विशेष गरिमा प्रदान की।

इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

सिख धर्म के विभिन्न संप्रदायों—जैसे निर्मला संप्रदाय, उदासी संप्रदाय, कबीर पंथ संप्रदाय एवं नानकसर संप्रदाय—के प्रतिनिधियों एवं धर्मगुरुओं ने राष्ट्र के प्रति माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की समर्पित सेवा और नेतृत्व के लिए उनके प्रति गहरा आभार और सम्मान व्यक्त किया।

इस अवसर को और भी स्मरणीय बनाते हुए दो महत्वपूर्ण पुस्तकों—“हार्टफेल्ट: द लेगेसी ऑफ़ फेथ” और “मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी”—का विमोचन किया गया, जो श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणादायी नेतृत्व यात्रा, उपलब्धियों और अभूतपूर्व पहलों को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती हैं।

श्री गुरु नानक देव जी की गहन और कालातीत शिक्षाओं—जो सार्वभौमिक भाईचारे, मानवता और निस्वार्थ सेवा का संदेश देती हैं—के प्रसार के उद्देश्य से, दिसंबर 2022 में गुजरात के कच्छ ज़िले स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री लखपत साहिब में एक भव्य गुरमत समागम का आयोजन किया गया। पावन भूमि लखपत वह स्थान है जहाँ श्री गुरु नानक देव जी अपनी दूसरी और चौथी धर्म प्रचार यात्राओं (उदासियों) के दौरान पधारे थे। आज भी यहाँ गुरु जी की खड़ाऊँ और नक्काशीदार लकड़ी की पालकी जैसी अमूल्य ऐतिहासिक निशानियाँ सुरक्षित हैं।

आज, ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री लखपत साहिब की महिमा और भव्यता माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के इस पवित्र स्थान के जीर्णोद्धार हेतु किए गए ठोस और समर्पित प्रयासों का सजीव प्रमाण है।

इस गुरमत समागम में सिख विद्वानों के साथ-साथ हज़ारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। दिव्य शबद-कीर्तन के दौरान, संगत ने सिख समुदाय के सम्मान, कल्याण और विरासत के संरक्षण के लिए उठाए गए निर्णायक कदमों हेतु माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति अपनी हार्दिक सराहना और गहन कृतज्ञता व्यक्त की। इस पावन अवसर पर “हार्टफेल्ट | द लेगेसी ऑफ़ फेथ” पुस्तक—जो सिख समुदाय के लिए उनके उल्लेखनीय और प्रेरणादायी योगदानों को रेखांकित करती है— संगत के मध्य वितरित की गई।

सभी धर्मों को समान रूप से अपनाने वाले एक समावेशी, न्यायपूर्ण और सशक्त समाज के निर्माण की परिकल्पना के साथ, चंडीगढ़ में अपनी तरह का पहला “अखिल भारतीय अल्पसंख्यक कॉन्क्लेव: अमृत काल में अल्पसंख्यकों की भूमिका” आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक मंच ने देश के सभी धर्मों के प्रमुख धार्मिक नेताओं, सरकार के प्रतिनिधियों, सुप्रसिद्ध कलाकारों तथा देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को एक साथ जोड़ने का कार्य किया।

इस कॉन्क्लेव के दौरान एक नए भारत के निर्माण हेतु एकजुटता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान जैसे साझा मूल्यों को सुदृढ़ करने पर गहन एवं सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

भारत की विविधता में एकता की सजीव भावना को साकार करते हुए, एक सर्वधर्म प्रतिनिधिमंडल ने सांप्रदायिक सद्भाव और शांति का संदेश प्रसारित करने के उद्देश्य से राजस्थान के अजमेर स्थित अजमेर शरीफ दरगाह तथा पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर का दौरा किया। इस पहल का उद्देश्य देश के विभिन्न धार्मिक समुदायों के लोगों के बीच एकता, आपसी सम्मान और अपनेपन के बंधन को और अधिक सुदृढ़ करना था।

इस अवसर पर, प्रतिनिधिमंडल ने अजमेर शरीफ दरगाह में ज़ियारत की और राष्ट्र की समृद्धि एवं कल्याण के लिए ब्रह्मा मंदिर में प्रार्थना अर्पित की।

लेह, लद्दाख में आयोजित 10-सूत्रीय लद्दाख शांति घोषणा पर हस्ताक्षर के महत्वपूर्ण अवसर पर, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध समुदाय ने माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति आभार एवं प्रशंसा पत्र प्रस्तुत किया और उन्हें एक वैश्विक शांतिदूत के रूप में सम्मानित किया।

इस अवसर पर, इंडियन माइनॉरिटीज़ फेडरेशन ने विश्व शांति के लिए आयोजित जन मार्च, विश्व शांति पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन तथा लेह, लद्दाख में 10-सूत्रीय लद्दाख शांति घोषणा पर हस्ताक्षर प्रक्रिया में सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सहभागिता के माध्यम से फेडरेशन ने शांति, सद्भाव और सतत विकास के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।

कश्मीर में अपनी तरह का पहला बहु-धार्मिक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न मुस्लिम समुदायों के प्रमुख धार्मिक नेताओं की सहभागिता रही। इनमें सुन्नी, शिया, सूफी, दाऊदी बोहरा, पसमांदा मुस्लिम तथा गुर्जर-बकरवाल समुदायों के प्रतिनिधि शामिल थे, जो अनुच्छेद 370 के हटने के बाद पहली बार एक मंच पर एकत्र हुए। इस महत्वपूर्ण अवसर पर जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के माननीय उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। यह सम्मेलन कश्मीरियत की शाश्वत भावना, सामाजिक लचीलेपन और शांति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतिबिंब बना।

मुंबई में आयोजित ‘जज़्बा-ए-हुबुल-वतनी’ कार्यक्रम में सुन्नी, शिया, सूफी, अहमदी, दाऊदी बोहरा एवं पसमांदा समुदायों के मुस्लिम नेताओं ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए “मुंबई प्रस्ताव” पारित किया।

इस कार्यक्रम में धार्मिक नेताओं के साथ-साथ विद्वानों, शिक्षाविदों, कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों, खेल हस्तियों, बॉलीवुड कलाकारों, पद्म पुरस्कार विजेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित अनेक प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता रही। इस अवसर पर भारत की उल्लेखनीय विकास यात्रा में मुस्लिम समुदाय के अमूल्य योगदान का सम्मानपूर्वक उत्सव मनाया गया।

कारगिल में विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए लोगों का एक भव्य संगम देखने को मिला, जहाँ सभी ने माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में वर्ष 2019 में अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने के बाद इस क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का जश्न मनाने हेतु एकजुटता दिखाई।

“सलाम कारगिल” थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता रही। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनने और भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के साझा विज़न में योगदान देने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से व्यक्त किया।

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